माँ ब्रह्मचारिणी परिचय
माँ ब्रह्मचारिणी नवदुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं। “ब्रह्म” का अर्थ है तप और ज्ञान, और “चारिणी” का अर्थ है आचरण करने वाली। यह स्वरूप तपस्या, संयम, ज्ञान और भक्ति का प्रतीक है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन इनकी पूजा से साधकों को अटूट धैर्य, आत्मबल और लक्ष्य प्राप्ति की शक्ति मिलती है।
माँ ब्रह्मचारिणी नाम की उत्पत्ति (शब्दार्थ)
- ब्रह्म = तप, ज्ञान, ब्रह्म का स्वरूप
- चारिणी = आचरण करने वाली
इस प्रकार “ब्रह्मचारिणी” का अर्थ हुआ “ब्रह्म का आचरण करने वाली” या “तपस्विनी”।
माँ ब्रह्मचारिणी आकृति और प्रतीकात्मक महत्व
रूप वर्णन:
- सिर पर तेजमयी आभा
- दाहिने हाथ में जपमाला
- बाएँ हाथ में कमंडल
- साध्वी वेशभूषा में, पदयात्रा करती हुई मुद्रा
प्रतीकात्मकता:
- जपमाला: निरंतर भक्ति और मंत्रजप का प्रतीक
- कमंडल: संयम और पवित्रता
- सरल वेश: तप और साधना का संदेश
- प्रेरणा: आत्मसंयम और आध्यात्मिक लक्ष्य की ओर अग्रसर होना
माँ ब्रह्मचारिणी कथा और पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ ब्रह्मचारिणी हिमालय की पुत्री पार्वती का तपस्विनी रूप हैं। भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए इन्होंने हजारों वर्षों तक कठिन तप किया, जिसके दौरान वे खुले आसमान के नीचे, निर्जल और अन्नरहित रहकर केवल पत्तों और बेलपत्र पर जीवनयापन करती रहीं।
माँ का यह स्वरूप तप, धैर्य और अटूट विश्वास की मिसाल है।
माँ ब्रह्मचारिणी – नवरात्रि में महत्व (दूसरा दिन)
नवरात्रि का दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन की पूजा से साधक को आत्मसंयम, भक्ति और जीवन में आने वाली कठिनाइयों को सहन करने की शक्ति प्राप्त होती है।
2025 में नवरात्रि का दूसरा दिन – 23 सितंबर 2025।
माँ ब्रह्मचारिणी पूजा विधि और सामग्री
तैयारी:
- सुबह स्नान कर पीले या गुलाबी वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- माँ ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
आवश्यक सामग्री:
- फूलमाला, अक्षत, रोली, चंदन
- शक्कर, मिश्री, और गुड़
- कमंडल का प्रतीक (यदि संभव हो)
- दीप, धूप, नैवेद्य
- गंगाजल, मौली, पुष्प
पूजा क्रम:
- कलश स्थापना के बाद माँ ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें।
- फूल, अक्षत, और चंदन अर्पित करें।
- मंत्रजप और ध्यान करें।
- मिश्री या शक्कर का भोग लगाएं।
- आरती और प्रसाद वितरण।
माँ ब्रह्मचारिणी मंत्र और आरती
बीज मंत्र:ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
ध्यान मंत्र:दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
आरती (संक्षेप):
ब्रह्मचारिणी माँ की जय जयकार,
दूसरे दिन का करो सत्कार।
जपमाला कमंडल धारण कर,
तपस्या से जग को उद्धार॥
माँ ब्रह्मचारिणी पूजन से लाभ
- कठिन परिस्थितियों में धैर्य और संयम बनाए रखने की शक्ति
- तप और साधना में सफलता
- मानसिक शांति और एकाग्रता
- लक्ष्य प्राप्ति में आने वाली बाधाओं का निवारण