माँ कूष्मांडा परिचय
माँ कूष्माण्डा नवदुर्गा का चौथा स्वरूप हैं। मान्यता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब ब्रह्मांड की रचना माँ कूष्माण्डा के ईषत् हास (हल्की मुस्कान) से हुई। इन्हें “आदि स्वरूपा” और “अष्टभुजा देवी” भी कहा जाता है। नवरात्रि के चौथे दिन इनकी पूजा से ऊर्जा, स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
माँ कूष्मांडा नाम की उत्पत्ति (शब्दार्थ)
- कूष्माण्ड = “कु” (थोड़ा), “ऊष्म” (ऊर्जा/उष्णता), “अण्ड” (ब्रह्मांड)
अर्थात वह देवी, जिनकी हल्की मुस्कान से सृष्टि और ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई।
माँ कूष्मांडा आकृति और प्रतीकात्मक महत्व
- रूप वर्णन:
- आठ भुजाएँ, प्रत्येक में अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र और वरमुद्रा
- हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, चक्र, गदा, कमल, अमृत कलश और जपमाला
- वाहन: सिंह
- कमलासन पर विराजमान
- प्रतीकात्मकता:
- अमृत कलश: स्वास्थ्य और अमरत्व का प्रतीक
- जपमाला: आध्यात्मिक साधना और भक्ति
- सिंह: साहस और शक्ति
- सृष्टि की रचयिता और पालनकर्ता
माँ कूष्मांडा कथा और पौराणिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार और शून्य था, तब माँ कूष्माण्डा ने अपनी दिव्य मुस्कान से सूर्य और ब्रह्मांड की रचना की। सूर्य मंडल में वास करने वाली यह एकमात्र देवी हैं, जिनकी तेजस्विता से ही पूरे ब्रह्मांड को प्रकाश और ऊर्जा मिलती है। इन्हें “सूर्यलोक की अधिष्ठात्री” भी कहा जाता है।
नवरात्रि में महत्व (चौथा दिन)
नवरात्रि का चौथा दिन माँ कूष्माण्डा के पूजन के लिए समर्पित है। इस दिन का पूजन करने से जीवन में नई ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि का संचार होता है।
2025 में नवरात्रि का चौथा दिन – 25 सितंबर 2025।
माँ कूष्मांडा पूजा विधि और सामग्री
तैयारी:
- सुबह स्नान कर हरे या नारंगी रंग के वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थल को फूलों और दीपक से सजाएँ।
- माँ कूष्माण्डा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
आवश्यक सामग्री:
- कमल के फूल
- कुमकुम, चंदन, अक्षत, मौली
- सफेद या नारंगी मिठाई का भोग (जैसे मालपुआ या मिश्री)
- नारियल, पान, सुपारी
- दीप, धूप, नैवेद्य
पूजा क्रम:
- कलश स्थापना और गणेश वंदना।
- माँ कूष्माण्डा का ध्यान करें।
- पुष्प, अक्षत और कुमकुम अर्पित करें।
- मालपुआ या मिश्री का भोग लगाएँ।
- मंत्रजप और आरती करें।
माँ कूष्मांडा मंत्र और आरती
माँ कूष्मांडा बीज मंत्र:ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
माँ कूष्मांडा ध्यान मंत्र:सूर्यमंडल मध्यवस्था, चतुर्बाहुं त्रिनेत्राम्। कुशमाण्डा शुभां देवीं, त्रिनेत्रां कमलासना॥
माँ कूष्मांडा आरती (संक्षेप):
कूष्माण्डा माँ की जय जयकार,
चौथे दिन का करो सत्कार।
सृष्टि की जननी शक्ति अपार,
दे दो हमको आशीर्वाद अपार॥
पूजन से लाभ
- जीवन में ऊर्जा और उत्साह की वृद्धि
- अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु का आशीर्वाद
- रोग और दोषों का निवारण
- सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास
मां कुष्मांडा पूजा मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कुष्मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
वन्दे वांछित कामर्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कुष्माण्डा यशस्वनीम्।।
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्माण्डा शुभदास्तु मे।।